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गजल : ऐतबार

गजल : ऐतबार

जो राह मिला वो प्यार के काबिल नहीँ होता,


हर चेहरा ऐतबार के काबिल नहीँ होता,


खिलने को तो खिल जाता है हर शाख नया फूल,


गुलशन हर एक बहार के काबिल नहीँ होता,


कहने को तो तिनका है डुबते का सहारा,


सब जानते हैँ तिनका कभी साहिल नहीँ होता,


मुश्किल नहीँ है झेलना दुश्मन को जहाँन् मेँ,


यारोँ इससे बङा कोई जाहिल नहीँ होता,


खंजर से हुए खून, तमंचे से हुए खून,


नजरोँ से बङा कोई कातिल नहीँ होता,


हम तो मुजाफ करते रहे सब की खता मेँ,


हम जैसा जिगर वाला ग़ाफिल नहीँ होता,


ललकार कर सुरमाओँ को दो हाथ तो करे,


पर कोई आगे बढ़ के मुकाबिल नहीँ होता॥R॥

लोग पत्थर क्योँ पुजते हैँ?

लोग पत्थर क्योँ पुजते हैँ?

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
संगीत सुनकर ज्ञान नहीँ मिलता,

मन्दिर जाकर भगवान नहीँ मिलता,

पत्थर तो लोग इसलिये पुजते है क्योँकि,

विश्वास के लायक इन्सान नहीँ मिलता॥श्री राम॥

इत्तिफाक

इत्तिफाक


सिर्फ बंधन को विश्वास नहीँ कहते,


हर आँसू को

जज़्बात

नहीँ कहते,


किस्मत से मिलते है ज़िन्दगी मेँ रिश्ते,


इसलिए रिश्तोँ को कभी इत्तिफाक नहीँ कहते॥R॥
-RAMNIVAS BISHNOI

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